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आपका भी डॉक्टर इंटरनेट है क्या?

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अगर आप भी इंटरनेट पर स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का पता लगाने की कोशिश करते हैं तो आपको सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि आप मनोवैज्ञानिक विकार 'साइब

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अगर आप भी इंटरनेट पर स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का पता लगाने की कोशिश करते हैं तो आपको सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि आप मनोवैज्ञानिक विकार ‘साइबरकॉन्ड्रिया’ के शिकार हैं ।

जब कोई बीमार होता है।तो उसे इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले जाया जाता है,ताकि डॉक्टर मरीज की जांच कर बीमारी के लक्षणों का पता लगा सके और उसी आधार पर मरीज का इलाज कर सके।‌ बदलते वक्त के साथ बीमारी का पता लगाने की जिम्मेदारी अब इंटरनेट पर आ गई है।‌‌ शरीर में जरा सी कमजोरी भी आ जाती है तो लोग झट से मोबाइल या कंप्यूटर / लैपटॉप पर इंटरनेट के जरिए उसकी वजह तलाशने लगते हैं। पढ़ने में आपको यह आम बात लगेगी,लेकिन हकीकत‌ में यह भी एक बीमारी है,जिसे हम’साइबरकॉन्ड्रिया’कहते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की चिंता करने लगता और उपचार को लेकर इंटरनेट पर सर्किंग करता रहता है। अन्य लोगों से बीमारियों की बातें सुनकर वह खुद में वैसे ही लक्षण ढूंढने लगता है।अपने स्वास्थ्य से संबंधित छोटे-छोटे लक्षणों को भी बड़ा समझने लगता है।‌ वह दूसरों पर विश्वास करना कम कर देता है।‌ डॉक्टर के परामर्श के बाद भी यकीन नहीं होता कि सब कुछ ठीक है। ये सभी साइबरकॉन्ड्रिया के लक्षण हैं.आजकल हर उम्र के लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं,मगर युवा सबसे ज्यादा साइबरकॉन्ड्रिया की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें कोई बीमारी हो न हो,लेकिन उससे जुड़े लक्षण इंटरनेट पर सर्च करने लगते हैं।कई बार इंटरनेट पर पढ़ी हुई सामग्री के आधार पर खुद से दवा लेने से गलत इलाज हो जाता है,  दवाई‌ का गलत प्रभाव पड़ने लगता है,‌ जिससे बीमारी ठीक होने की जगह और बढ़ जाती है। शायद यही वजह है कि दुनिया भर के डॉक्टर आज साइबरकॉन्ड्रिया के शिकार लोगों से परेशान हैं.क्योंकि ये लोग इंटरनेट पर ही अपनी बीमारी की पहचान करके,ऑनलाइन बताए गए उपायों से इलाज शुरू कर देते हैं,बिना इस बात की परवाह किए कि डॉक्टर के परामर्श के बिना दवाई खाना सेहत को और खराब कर सकता है।
कई बार साइबरकॉन्ड्रिया की समस्या इतनी खतरनाक हो जाती है कि कोई बीमारी न होने के बाद भी,‌ ‌ व्यक्ति इंटरनेट पर अलग – अलग मेडिकल सामग्री पढ़कर अपने शरीर में उस बीमारी के लक्षणों को ढूंढना शुरू कर देता है और धीरे धीरे यह स्थिति एक तरह के मनोविकार में बदल जाती है‌। दुनिया भर में करोड़ों लोग आज इस मानसिक बीमारी के शिकार हैं।ऐसे में जरूरत है बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने की ,ताकि लोग इस तरह के मनोवैज्ञानिक विकार के शिकार न हो पाएं।

और खुद पर नियंत्रण नहीं रहता 

साइबरकॉन्ड्रिया एक प्रकार का एंजायटी डिसऑर्डर है। जिसमें इंटर के माध्यम से अपनी शारीरिक और मानसिक समस्याओं का इलाज ढूंढने लगता है। इस खोजबीन में स्वयं पर नियंत्रण रखना मुश्किल होता है। खोजबीन के दौरान चिंता या भय बना रहता है , जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के लिए चिकित्सक से ही परामर्श इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं को भरोसेमंद न समझें। बीमारी के लिए किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेने में संकोच न करें। अपनी चिंता और भय के अन्य कारणों को जानने की कोशिश करें। बीमारी के लक्षणों को स्वयं के विचारों से चुनौती न दें जीवन के अन्य कार्यों में व्यस्त रहें , ताकि अत्यधिक नेट सर्फिग न कर पाएं। शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाएं और योग, मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। जरूरत पड़ने पर ही मानसिक रोग विशेषज्ञ से मिलें।
लेखक- डॉ युवराज पंत (मनौवैज्ञानिक)

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