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कोरोना संकट में भी नहीं बदला पाकिस्तान

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पाकिस्तान में कोरोना वायरस महामारी दिन-ब-दिन खतरनाक शक्ल लेती जा रही है। फरवरी के शुरू में जब वहां कोरोना के पहले मामले की पुष्टि हुई थी, तभी महामारी से निपटने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इमरान खान 24 मार्च तक कहते रहे कि तालाबंदी की जरूरत नहीं। आखिरकार वायरस के लगातार बढ़ रहे मामले और चौतरफा दबाव के बाद इमरान को 25 मार्च को तालाबंदी का एलान करना ही पड़ा। देरी से लिए गए इस फैसले के कारण अब देश बड़ी मुश्किल में है, जिसके कारण पाक जनता में इमरान सरकार के प्रति जबर्दस्त रोष पाया जा रहा है। पाकिस्तान में संक्रमितों की संख्या करीब 12,000 है, तो मृतकों का आंकड़ा 250 से अधिक हो गया है।

डब्ल्यूएचओ का मानना है कि अगर कोरोना से निपटने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो जुलाई के मध्य तक संक्रमितों का आंकड़ा दो लाख से ज्यादा हो जाएगा। अब भी हालत की गंभीरता को न देखते हुए हाल ही में कट्टरपंथी मौलवियों के दबाव में लॉकडाउन के दौरान सरकार ने रमजान के इस पवित्र महीने में सामूहिक तौर पर मस्जिदों में नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी है। इमरान खान ने अपनी सरकार के इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि लोगों को मस्जिदों में जाने से नहीं रोका जा सकता। लेकिन इससे सामाजिक दूरी का अनुपालन नहीं हो सकेगा। अनेक डॉक्टरों ने सामूहिक नमाज के फैसले पर अपनी चिंता जताई है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जहां कई देशों ने रमजान में मस्जिदों में नमाज अदा करने पर पाबंदी लगा दी है और लोगों को घरों में इबादत करने के लिए कहा है,

वहीं पाकिस्तान इस मुश्किल घड़ी में भी अपने नागरिकों की जिंदगी की परवाह नहीं कर रहा।

पाकिस्तान में जब से तालाबंदी हुई है, भोजन और हर रोज प्रयोग होने वाली चीजों की कमी महसूस की जा रही है। लाखों गरीब और कामगार दैनिक जीवन की जरूरत की चीजों में वंचित है। प्रतिदिन कमाकर खाने वाली आबादी के सामने भुखमरी का संकट आ खड़ा हुआ है। हजारों ऐसे लोग सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पाक सरकार अब प्रभावित लोगों को मदद दे रही है। लेकिन इससे नकदी की मांग पूरी नहीं हो रही।

सरकार के पास इतने फंड ही नहीं है, जिससे वह मांग पूरी कर सके। हाल ही में इमरान के मंत्रिमंडल की आर्थिक समन्वय समिति ने देश में कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए संकट से निपटने के लिए 1,200 अरब रुपये के राहत पैकेज की मंजूरी दी है।

दूसरी तरफ पाक की अर्थव्यवस्था पहले से ही खराब चल रही है। पाक नकदी संकट से जूझ रहा है। खासकर पाक का निर्यात उद्योग सबसे बड़े नकदी संकट का सामना कर रहा है। महामारी के कारण निर्यातकों के उत्पादों की मांग कम हो गई है। विशेष तौर पर कपड़ा उद्योग प्रभावित हुआ है। इससे सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने में जबर्दस्त मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इधर आईएमएफ पाकिस्तान को 1.4 अरब डॉलर की मदद देने के लिए राजी हुआ है। जबकि विश्व बैंक ने पाक को फौरी तौर पर 24 करोड़ डॉलर का पैकेज मुहैया कराया है। पाकिस्तान ने वायरस से निपटने के लिए कई देशों के आगे हाथ पसारे हैं और 59.5 करोड़ डॉलर की मदद मांगी है।

चीन ने मदद करने का वादा किया है। पर पाक की जनता चीन से मदद लेने से गुरेज कर रही है। पाक जनता अच्छी तरह जानती है कि चीन मदद के नाम पर कई देशों को चिकित्सा उपकरण बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है और उन्हें चीन जो मदद देगा, उसकी कीमत मुनाफे के साथ वसूल करेगा। उसे इस बात की आशंका है कि चीन पाकिस्तान के कर्ज के बोझ में दबकर अपनी कॉलोनी न बना ले। पाक की जनता चीन द्वारा पाक में चलाई जा रही परियोजनाओं के खिलाफ है।

जनता का मानना है कि इनको पूरा होने के बाद इन पर चीनी लोग तैनात हो जाएंगे और वे बेरोजगार हो जाएंगे। पहले ही एक अनुमान के अनुसार महामारी के कारण पाकिस्तान में 1.87 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने और अगले तीन माह में 25 अरब रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

तस्वीर का एक रुख यह भी है कि जहां भारत एकजुट होकर कोरोना से जंग लड़ रहा है, वहीं पाकिस्तान सीमा पार से भारत में बड़ी तेजी से आतंकवादियों की घुसपैठ करा रहा है। ऐसे समय में भी वह भारत से अपनी तथाकथित दुश्मनी को नहीं भुला पा रहा है। ऐसा नजर आता है कि सीमा पार पर गोलाबारी में तेजी और घुसपैठ उसकी यह नाकाम कोशिश किसी साजिश के तहत हो रही है।

पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने एक बयान में भारत पर आरोप लगाया है कि वह कोरोना की आड़ में जान-बूझकर भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक समूह को निशाना बना रहा है। दरअसल पाकिस्तान का मकसद अपने आंतरिक मसलों से दुनिया का ध्यान हटाना है। हकीकत यह भी कि उसके अपने देश में अल्पसंख्यक समुदाय निशाने पर हैं।

अंत में यही कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में पाक की इमरान सरकार कमजोर साबित हुई है। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी को बेहद लापरवाही से लेने के आरोपों से घिरे प्रधानमंत्री इमरान खान के मंत्रिमंडल को निष्प्रभावी करार दे दिया है। वहां के हालात खतरनाक रूप ले चुके हैं, इसलिए कोई चमत्कार ही अब पाकिस्तान को इससे बाहर निकाल सकता है।