HomeMadhya Pradesh

क्या शिवराज सरकार ने सबको दिया रोजगार ? : अभय दुबे

CM शिवराज सुबह नरोत्तम के घर पहुंचे, मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज
संकट के दौर में सरकार सभी मीडिया कर्मियों को सम्मान निधि के रूप में 10 हजार रू प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान करे- डॉ. संदीप सबलोक
संकट के दौर में सरकार सभी मीडिया कर्मियों को सम्मान निधि के रूप में 10 हजार रू प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान करे- डॉ. संदीप सबलोक
भोपाल। राष्ट्रीय कांग्रेस के मीडिया कॉर्डिनेटर अभय दुबे ने जारी एक बयान में बताया कि आज मध्यप्रदेश भाजपा सरकार ने श्रमिकों को मनरेगा में काम देने के लिए * ‘सबकों रोजगार’ * के नाम पर एक झूठ परोसा है और  प्रदेश के श्रमिकों के साथ बहुत बड़ा छल किया है। 
मध्यप्रदेश के श्रमिक जो बड़ी संख्या में प्रदेश वापस आए हैं उन्हें काम देने की बात कही जा रही है । 
जबकि सच्चाई यह है कि मध्यप्रदेश में कुल 93.55 लाख मनरेगा में एक्टिव मजदूर हैं जिनमें से सिर्फ 20.7 लाख मजदूरो को 1 अप्रेल से अब तक काम दिया गया है । 
जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 61 लाख मजदूर था । इसका अर्थ साफ है कि लगभग 40 लाख मजदुरों को काम से नकारा गया है । 
मनरेगा के एक्ट में प्रावधान है कि अगर उन्हें सरकार काम देने में असमर्थ रहती है तो मजदूरी का आधा मुआवजा दिया जाएगा । 
तब मध्यप्रदेश सरकार को चाहिए कि वे 40 लाख मजदुरों को मुआवजा प्रदान करें । 
ये बात भी हतप्रभ कर देने वाली है कि इस कठिन समय में मजदुरों को एवरेज मजदूरी मात्र 180 रु प्रतिदिन दी गई है । जबकि हाल ही में 24 मार्च को  केंद्र ने मध्यप्रदेश की मजदूरी दर 190 रु प्रतिदिन निर्धारित की है । 
यह और भी चौकाने वाली बात है कि मध्यप्रदेश की मनरेगा की मजदूरी पूरे हिंदुस्तान में सबसे कम है । केरल में 291 रु , कर्नाटका में 275 रु गुजरात मे 224 रु और राजस्थान में 220 रु इत्यादि है । 
क्या शिवराज जी इतने निर्मम है कि श्रमिकों के हक में आवाज नही उठाई, जबकि न्यूनतम कृषि मजदूरी 231 रु प्रति दिन है । 
अब तो श्रमिकों को 350 रु लिविंग वेज मिलने चाहिए, ताकि वे अपनी आजीविका चला सके ।