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क्या सिर्फ नोट छापने से गिरती अर्थव्यवस्था संभल जाएगी ?

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Economy
देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की सोच ही खत्म हो जाए लेकिन देश चलाना हो तो आप क्या कहेंगे,  कुछ नहीं आरबीआई (RBI)  से कहेंगे कि नोट छापते जाए  मौजूदा वक्त का सच यही है कि सिर्फ और सिर्फ नोट छप रहे हैं और सरकार देश को चला रही है. आप कहेंगे कि यह कैसे संभव है ऐसे में तो inflation रेट बढ़ता चला जाएगा। यानी महंगाई चरम पर पहुंच जाएगी यकिनन महंगाई चरम पर पहुंचने की स्थिति जरूर आएगी क्योंकि इस वक्त का सच यही है कि इस देश में रोजगार नहीं है और आपके पास  अगर  बैंक में जमा पैसा है या अपने इंवेस्ट किया है उसके जरिए जो भी ब्याज (Interest) आपको मिलता है उससे ज्यादा महंगाई दर इस देश के भीतर की है।

देश कि बड़ी तादाद में कंपनियों अपने आप को दिवालिया (Bankrupt) कर सरकार के दरवाजे पर दस्तक देने पहुंच चुकी है कि उनकी तादाद हजारों में है.उन कंपनीयों के लिए भी कोई खरीदार नहीं मिल रहा है । सरकार के अपने बैंकिंग इंस्टीट्यूशन हो या नॉन बैंकिंग इंस्टीट्यूशन हो सभी लगातार घाटे में चल रहे हैं और इस स्थिति इतनी नाजुक होती जा रही है कि बैंकों का एनपीए यानी वह पैसा जो कर्ज में दिया जाता है और लौटता नहीं है जिसको Bad loan कहते हैं. वह इस साल के अंत तक 20 लाख करोड़ तक ऑफिशियली पहुंच जाएगा। जो मौजूदा वक्त में लगभग 10-11 लाख करोड़ के लगभग है जो अगस्त बीतते-बीतते 12 लाख करोड़ हो जाएगा ऑफिशियल ही का मतलब है कि इसमें  राइट ऑफ किया पैसा नहीं जोड़ा गया है इसमें सरकार अपने तौर पर कुछ का कर्ज माफ कर देती है. वह पैसा नहीं जोड़ा गया है यह बिल्कुल बैंकों के बुक में लिखे हुए कर्ज का हिस्सा बता रहे हैं।



बैंको का पुनपूंजीकरण जैसी  स्थिति क्यों 

 20 लाख करोड़  एनपीए  अगर बैंकों पर होगा तो आरबीआई जिस दिशा में जाना चाहती उसका मतलब है बैंकों के (recapitalization) पुनपूंजीकरण  की दिशा में बढ़ना चाहती है.(recapitalization) पुनपूंजीकरण  का मतलब है बैंकों को उसके शेयर को सरकार प्राइवेट हाथों में बेचना शुरु कर देगी यानी इस देश के भीतर जब बैंकों का (nationalization)राष्ट्रीयकरण  हुआ था। जनता का भरोसा  जागा था कि सरकार अब हमने चुनी है और बैंक हमारे ही हैं अब उन बैंकों को दुबारा निजी हाथों में दिया जा रहा है जिसके बाद क्या स्थिति बनेगी कोई नहीं जान  सकता है इस दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं.लेकिन सील सिलेवार तरीके से अपने पैसे को लेकर आप अपनी स्थिति  को समझ लिजिए तब आप समझ पाएंगे कि जिस economy ज़मीन पर हम बैठे हुए हैं उसको लेकर कोई विजन इस  सरकार के पास नहीं है और यह सोच नहीं पा रही कि किस तरह इस देश की economy को चलाया जाए ।



इस देश के भीतर महंगाई दर 6.09 परसेंटे है 6.09 परसेंट महंगाई दर का  मतलब बहुत  साफ है कम से कम बैंक से Interest Rate तो इससे ज्यादा मिलना चाहिए. जो saving account है और जो Current Account है उस पर दो से तीन पर्सेंट ज्यादा Interest Rate मिलता नहीं है.याने  दुगना महंगाई दर है अगर आप एफडी खरीद लेते हैं अगर आप Mutual fund खरीद लेते हैं अगर आप Equity में पैसे लगाते हैं अगर आप Real Estate में ही चले जाते हैं कुछ भी कर लेते हैं मगर कहीं से रिटर्न नहीं है. इस देश के भीतर मौजूदा सच यही है कि सोना खरीदो तो कुछ लाभ मिल जाएगा. आज की  तारीख में हम बात कर ले इस चीज को समझने की कोशिश करे तो कि 1 साल के लिए अपने equity  ली है या  1 साल के लिए fixed deposit  लिया है या फिर cash liquid fund  के तौर पर आपने  अकाउंट में रखा है तो क्या किमत आपको उसकी मिलेगी। इक्विटी में मिलेगी 0.34% परसेंट एक साल की, आपको कैस लिक्विड 4.39% पर्सेंट इंटरेस्ट मिलेगा, इसके अलावा 5.10% पर्सेंट जो मॅग्ज़िमम है वह मिलेगा एफडी पर इसके आलावा  सिर्फ गोल्ड बचता है गोल्ड की कीमत क्या है गोल्ड की कीमत 55000 रुपया 10 ग्राम है. इस देश भीतर  में गोल्ड खरीद पाने की हैसियत कम से कम 92% लोगों की नहीं है. जिस हिसाब से महंगाई बढ़ रही है और सोने की कीमत भी  और सोने की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में होती है. 



अब सरकार ने   एवं  आरबीआई ने एलान कर दिया है कि आप अपनी गोल्ड और ज्वेलरी के जरिये आप 90% तक लोन ले सकती है. बाकी चीजों पर कितना लोन मिलेगा ये कहना मुश्किल है चाहे आप मकान गिरवी रख दीजिए या फिर दुकान को गिरवी रख दीजिए अपनी इंडस्ट्रीज को गिरवी रख दीजिए पता नहीं उसकी  कोई किमत  है या नही है बाजार में क्योंकि इसके जरिए आप जितना लोन चहाते है मिलना मुश्किल है तो ऐसे  में लोन दिया जाएगा तो सिर्फ सोने के आधार पर क्योंकि अंतराष्ट्रीय भाव उसका  लगातार बढ़ा है. उसके आधार पर आपको लोन दिया जा सकता है क्योंकि उसको कल बैंक बाजार में बेच देंगे तो उनको पैसा रिटर्न हो जाएगा बाकी जगहों से  तो रिटर्न नहीं होगा ।  लेकिन देश में सोना खरीद पाने की स्थिति सबकी तो नहीं है. स्थिति यह है कि इस देश के भीतर 6 करोड लोग जो हैं जो कमाते हैं और अपना पीएफ कटाते हैं ,सिर्फ 6 ही करोड़ लोग हैं उनके जरिए जो लगभग  10 लाख करोड़ रुपए जमा है. पीएफ के भीतर मैं से एक करोड़ लोगों ने अपना पैसा इसी 4 महीने के दोर में निकाला है. आज की तारीख तक तकरीवन  99लाख  लोग अपना पैसा निकाल चुके हैं. इन 99 लाख लोगों में से 96 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी‌  कमाई 50,000 रूपए महीने से कम है  और 55,000 रुपए में 10 ग्राम्स तोला सोना मिलता है।  96 लाख लोगों मे से जो  92 लाख जो है उसका भी एक  बड़ा हिस्सा उसकी तादाद है लगभग 80 लाख इनकी कमाई 15000 हजार रुपए महीने से कम है. जिन्होंने पीएफ से अपना पैसा निकाला है यह डाटा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस देश के भीतर लोग कितना कमाते हैं और कितना पीएफ  उनको कटता  है, यह से पता चलता है जो पैसा निकाला गया वह 26 हजार से लेकर 44 हजार रुपए   तक निकाला गया है. यानी स्थिति इतनी नाजुक होते जा रही है कि भविष्य के लिए जो  पैसा जमा रखा  जा रहा था पीएफ में, अब नौकरी नहीं है तो वह भी पैसा है निकाला जा रहा है और जो पैसा निकाला जा रहा है अगर वह पैसा भी घर पर रखेंगे या बैंक में रखेंगे तो  उस पैसे की कीमत भी कम हो जाएगी।  क्योकि हमारे पास कोई ऐसा  तरीका  बच नहीं पा रही है जिसमें से पैसे की कीमत किसी तरीके से बढ़ जाए. इसीलिए रिजर्व बैंक में अपने तौर (recapitalization) पुनपूंजीकरण  प्लान भी रखा सरकार के सामने और यह कह कर रखा कि बैंकों की स्थिति को अगर सुधारना है. तो उसके लिए अब हमें पैसा चाहिए बैंको को ही  पैसा चाहिए।

रघुराम राजन भी जाहिर कर  चुके है बैंको के एनपीए  के लिए चिंता 

रघुराम राजन जो पहले आरबीआई के गवर्नर रहे उनका कहना है कि 20 लाख करोड़ रुपया इस साल के अंत तक एनपीए हो जाएगा, क्योकि उसमे आप बाकी चीजों को नहीं जोड़ रहे हैं तो बाकी वह कौन सी चीज है जिसके जरिए बैंकों के ऊपर कर्ज और बढ़ता चला जाएगा।बैंकों की स्थिति नाजुक हो जाएगी लेकिन जब हम (recapitalization) पुनपूंजीकरण का जिक्र कर रहे तो इसको ओर समझने की कोशिश कीजिए सरकार के जहन में कई बातें चल रही हैं बैंको को क्या निजी हाथो में दे दिया जाये कुछ नाम भी निकल कर सामने आए बैंक ऑफ़ इंडिया , सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक। इनको पूरी तरह बेच दिया जाये क्या या फिर जहा 51 शेयर से ज्यादा है वह उस शेयर को बेचकर , पॉलिसी निर्धारित हम करेंगे इसलिए 51% शेयर रखकर अपने पास बाकी को सेल कर दें। इसमें जो लिस्टेड कंपनी आ रही है कि जो 6 बैंक माना जा रहा है जिनके सेल किए जा सकते हैं शेयर। उसमें एसबीआई बैंक है, पीएनबी बैंक है, बैंक ऑफ़ बड़ोदरा है ,केनरा बैंक ,यूनियन बैंक ऑफ इंडिया। इनके जो शेयर गवर्मेंट के पास है एसबीआई के शेयर 56.9% है, पीएनबी के शेयर 83.19%, बैंक ऑफ बड़ौदा के 71.6%, केनरा बैंक 55%, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया 89.07%, बैंक ऑफ इंडिया के  89.1% है. 

अब सवाल है की इन बैंको को अगर सेल भी किया जायेगा तो पैसा भी कितना आएगा माना जा है लगभग 90000 करोड रुपए आ जाएंगे और 40000 करोड रुपए तुरंत बैंकों को चाहिए। दूसरा सवाल फिर आपके जेहन में आना भी चाहिए की जब नोट छापे ही जा रहे तो नोट बैंको के लिए ही न छाप दिए जाये या सरकार चलाने के लिए ही नोट छपे जा रहे हैं. इस देश में कुछ चीजे  डेवेलोप हो नहीं पा रही है. तो ये मुसीबत सबसे बड़ी यहाँ है कि अगर बैंको को ठीक करने के लिए भी अगर बैंको को नोट छाप- छाप के दिए जाये तो फिर स्थिति आर्थिक तोर पर इस देश के भीतर इतनी दिवालिया हो जाएगी की यहाँ देश ही किसी दिन भरभरा के गिर जायगा। इसीलिए जो प्लान है. उसमे कहा गया है 12 से 18 महीने यानी 2022 तक आप शेयर्स बेचिये 51% शेयर अपने पास रखिये बाकि बची ये बुक जो बैंक की वैल्यू होती है. उसको ठीक कीजिए उसको ठीक करने के बाद बैंक शेयर ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे और शेयर मार्केट में वह उछाल लाएंगे और मार्केट में वह जब आप शेयर बेचने जाएंगे तो ज्यादा कीमत मिलेगी। बैंक में investor है वह ज्यादा पैसा दे देंगे। यानि निजीकरण की भी तैयारी और बैंक के शेयर बेचने की भी तैयारी।

इसके तरीको को थोड़ा ओर सरलता अगर आप  समझना चाहते है तो ये समझिये की जो ऐसी Insurance कंपनी है. जो लोगों के insurance नही करती है बाकी घर मकान इनसब चीजों का insurance करती है. तीन कंपनी थी ओरियंट इंश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी इन तीनों के मर्जर की बात हो रही ये तीनों घाटे में चल रही है बैंको का भी कुछ इसी तरह हुआ स्थिति बिगड़ी तो मर्जर कर दिया गया यह भी 2018 के बजट में कहा गया था की इनका मर्जर कर देंगे, स्थिति और बिगड़ी तो कहा गया की मर्जर करने से कुछ नहीं हुआ.

अब कहा गया इनमें कुछ पैसा पंप किया जाए और यह लगभग 3475 करोड़ को इन तीनों जगह पर पंप किया जा रहा है और इनको यह कहा जा रहा है कि आपको जो शेयर कैपिटल का ऑथॉरिजेसन था .उसको भी हम बड़ा देते है जैसे National insurance लिए पहले 20600 करोड़ रूपए जो ऑथॉरिजेसों था. शेयर कैपिटल का उसको  7000 करोड़ कर दिया।  जो यूनाइटेड  इन्सुरेंस थी उसका लगभग 5000 करोड़ कर दिया गया जो ओरिएंटल इन्सुरेंस कंपनी थी उसका 2500 था  उसको बड़ा कर 5000 करोड़ ऑथरिजेन बड़ा दिया गया. यानि सब मार्किट में चले जाये value बडाए चीजों को develop  करें ,लेकिन कहा से करेंगे यहाँ तो लोगो के पैसे की  कीमत भी काम हो गयी है. 

वित्तीय घाटे का आधार कैसे निर्धारित किया ? 

यानि फिर समझ नहीं है इन सबके बीच का सच यह है कि इस देश के भीतर का वित्तीय घाटा है जो बजट में रखा गया था इस साल भर में हमको इतना घाटा होगा मान लीजिये साल बार में 100 रूपये घाटा होगा आपको जान कर हैरत होगी इसी तिमाही में ही 83 रुपये घाटे में चले गए यह बता रहा है कि वित्तीय घाटा जो है वह पूरे साल का था 796000 करोड का जो कि 3 महीने में 662000 करोड़ का घाटा हो चुका है. आप जो बजट बनाया गया था वह भी कैसे पूरा होगा impossible  सी चीज है लेकिन इस impossible  सी चीज के भीतर  का सच जानना चाहते हैं तो बैंक एक तरफ रहते हैं और बैंकों के जरिए सोना तो लोग खरीद नहीं पाएंगे जो insolvency और bankruptcy  बोर्ड बनाया गया का उसके भीतर में 3312 कंपनियों ने इस लॉकडाउन से पहले अप्लाई किया था कि हमारी कंपनी बैंक करप्ट हो गई है इसको आप बेचिए- खरीदी है किस रूप में कीजिए महत्वपूर्ण यह नहीं किसी भी देश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट दिवालिया नहीं होती है भारत में वह भी दिवालिया हो गई है और फरवरी तक का डाटा जो है मार्च-अप्रैल ,जून-जुलाई उसके बाद तो मान लीजिए लॉकडाउन की स्थिति थी इस बीच में तो बता दिया गया मैन्युफैक्चरिंग का काम तो रुक गया है.

मैनुफैचरिंग यूनिट हो रही है दिवालिया 

लेकिन मैन्युफैक्चरिंग 1347 यूनिट ने खुद को Bankrupt कर दिया और उस सीधे चलेंगे insolvency  एंड bankruptcy  बोर्ड के सामने कि आप इसकी कोई व्यवस्था कीजिए,उसमें जानकारी मिली कि 340 का कोई खरीदार ही नहीं है तो उसको कुर्की की तरफ बढ़ा दिया गया जो  था उसका 95 यूनिट एक प्लान बनाया गया है जो बाकी 77 थी उसको रिवाइज किया जा रहा है यानी किसी तरह से इन को चालू किया जा सके, 52 ने कहा कि आप बेच  नहीं सकते हैं तो हम विड्रॉल कर लेते हैं और 749 कंपनीस को लेकर अभी कोई काम शुरू हुआ नहीं है  यह स्थिति है इस  देश के भीतर की इंडस्ट्रीज की पर इतना ही नहीं इसमें जो कंपनी थी उसमें मेटल से जुड़ी कंपनी कंपनी, टेक्सटाइल से जुड़ी कंपनी, फूड से जुड़ी कंपनी, फूड बेवरेज से जुड़ी कंपनी मशीनरी से जुड़ी कंपनी , एकुप्मेंट से जुडी कंपनी ये  कंपनी आती है.

लॉकडाउन के बाद स्थिति ओर नाजुक हो गयी है क्योकि  आरबीआई खुद बता रहा है एक्सपोर्ट निचे जा रहा  है, मनुफैक्टरीन डेवलप हो  नहीं पा  रहा  है उन्होंने जो आज डाटा रखा है उसमे साफ कहा यही  पैसा नहीं है. जो  ईएमआई में  रियायत थी  अगस्त के बाद ख़त्म हो जायगी रेपो रेट में कोई चेंज नहीं करेंगे। याने लोन देना लेना यहाँ सब पुरानीं स्थिति है. आप को जीतना पैसा देना है उसको देना  ही पड़ेगा और ईएमआई  आपको देनी होगी। यहाँ स्थिति बहुत साफ  तोर पर आरबीआई ने साफ कर दी है. इसके  साथ आपके मन  में सवाल होने चाहिए, ऐसा क्यों होना चाहिए उसके लिए हमको लगता है कि सरकार के भीतर में फरोडिजम था. बैंको को लेकर  वह बहुत तेजी इस  बड़ा है. इतिहास में ऐसा  कभी नहीं हुआ साल 19 -20 के ईयर का ही डाटा देख लीजिए 185772 करोड़ ये रकम बैंक  फरोड की अब किसी बैंक के भीतर में अगर एक साल लगभग दो लाख करोड़ का फ्रॉड हो रहा है भारत के बैंको में जो कमर्सिअल बैंक है तो एनपीए  20 लाख करोड़ हो जाएगा। साल के अंदर यह तो बहुत छोटी रकम है इसका जिक्र इस लिए किया गया रघुराम राजन के जरिये यह और बड़ा हो सकता है. 

बैंको के मर्जर से स्थिति  सुधरेगी ?

यह भी जानना होगा जो बैंको का मर्जर किया गया उसके जरिये जो ब्रांचे बंद हुई है. वह अभी तक देश में 198  है उसमे सबसे ज्यादा  सबीआई के 80  ब्रांच बंद हुए है. जो मर्जर के बाद ब्रांच काम करने लगे उनकी तादात 438  है इसका मतलब है कि यह 438 ब्रांच जो दूसरी बैंकों के होंगे वह भी  एक-एक करके बंद होंगे और यह स्थिति धीरे-धीरे लाएगी कि बैंकों का जो खर्च है जैसे सरकार टेक्स पेयर का सारा पैसा अपने ऊपर खर्च कर लेती है. ठीक इसी तरीके से बैंक में पैसा जमा होता है. उस बैंक का जमा पैसे जो सरकार को देते हैं, फिर कॉरपरेट को देते है, इंडस्ट्रीस को देते है उसके जरिए ब्याज की कमाई होती है.

बैंक उसी  से चलते है लेकिन बैंको का यह खर्चा भी अब कम करने की स्थिति बैंक आने  लगे है जब तक रिकपेटलाइजेशन प्लान इम्प्लीमेंट नहीं होता और उसका मतलव बहुत  साफ है की इस इस तरीके से बैंको को उसके  शेयर को गवर्नमेंट  बेचेगी  ये  पहले राउंड  का है.  दूसरी स्थिति क्या है हमारे  बैंकिंग सिस्टम में भरी दवाव है. क्योकि   लगभग 52% एनबीफसी  की स्थिति है   जो नाजुक है कि  वह एक  लिहाज से  कर्ज में डुवा हुआ है और लोन डिफाल्ट उसमे से तो 10% साफ तोर   पर है और माना जा रहा है कि  एनबीएफसी का भी एनपीए जो नहीं लोटेगा , वह भी लगभग 10% छू देगा जो 9.61% है. आने वाले वक्त में ओर भी बढ़ जायेगा  किस तेजी से बढ़ा  है इसको इस रूप में  समझिये  कि 2020  में मार्च में यहाँ 4.6%था ,अभी ये 9.61% हो गया है. 2021 के मार्च तक ओर  भी आगे बढ़ जायेगा। यहाँ स्थिति लगातार बिगड़ती चली जा रही है  अब यहाँ सवाल है की क्या इन सब बातो का जिक्र प्रधान मंत्री लाल किले के प्राचीर से के सकते है या उनको करना चाहिए,  बताना चाहिए देश को कि ये स्थिति है.

चीजे सभाल नहीं पा रही है 50% से ज्यादा के बैंक लोन वह मोरोटीरियम में चला जाएगा तो हम क्या करगे ? नॉन फ़ूड क्रेडिङ है वह भी बढ़ कर 1 लाख  करोड़ से जायदा का हो रहा है याने की हर दिशा  में अगर  आप चलते चले जायगे और इन सबके बीच  अगर आप किसी भी क्षेत्र को लेते है चाहे वह रियल स्टेट को लीजिये चाहे MSME को लीजिए चाहे मुद्रा लोन को लीजिये अगर इनके जरिये भी लगभग 8 लाख करोड़ का जिक्र हो रहा है  इसे भी जोड़ते चले जाएगा तो स्थिति एक इमरजेंसी स्थिति आ  जायगी बैंको  सामने और शेयर बेचने से भी काम नहीं चलेगा तो ऐसे में लोग क्या करे सोना खरीद के रख ले सोना खरीदने की हैसियत नहीं है क्योंकि भारत तो पांच किलो आनाज पर जीता है देश के 80 करोड़ लोग पांच किलो आनाज पर जीते है खुद प्रधानमंत्री  ने यह जानकारी दी है. और पांच किलो आनाज आठ महीने लिए दिसंबर तक दिया जाएगा उसका खर्चा भी सरकार ने बता दिया है कि 2.25 लाख करोड़ यानी सवा दो लाख करोड रुपए उस पर  खर्च होंगे इस देश के 80 करोड़  लोगों को संभालने के लिए भोजन देने के लिए सरकार ही का डाटा जब कहता है सवा दो लाख करोड़ में यह चल जाएगी और 1 साल के भीतर में बैंक के भीतर  फ्रॉड दो लाख करोड़ के लगभग का हो जाता है

उसके क्या मतलब है और 5 साल का जब आकड़ा निकालिएगा कितने का वह घटा है , तो वह ओर बढ़ता  चला जाएगा 5 -6 लाखकरोड़ उधर घाटे होंगे  5 -6 लाख करोड़  माफ़ी हो जाएगी कर्ज देने वालों को तो इकनॉमी को चलने के बदले इकनॉमी को चूसने की परिस्थिति जो पैदा कर   दी गई उसमे आरबीआई  भी क्या करेगी निर्देश होगा तो नोट छपेगी लेकिन नोट छापने की प्रोसेस कब तक चलेगी और कैसे चलगी क्योंकि इस देश के भीतर छोटी छोटी परिस्थितियो में जब हम आखरी स्टेज में आपसे बात करे कीआप  आपना पैसा कहा लगाये तो लगता है की  के लिए चुनना चाहते है या तीन साल के लिए हमको  लगता है कोई भी पैंसा लगएगा तो  तीन साल के लिए पहले चुन ले एक साल स्थिति तो जान गए 5 साल के लिया लगाना चाहते है तो स्थिति और नाजुक हो जाएगी।

तीन साल के लिए आप पैसा इक्विटी के लिए सेंसेक्स में लगते है  तो इंट्रेस्ट मिलेगा 4.9 प्रतिशत। महगाई दर आज है 6.09 % प्रतिशत जो तब तक और बढ़ जाएगी अगर आप कैश में अपना पैसा रखते है ओर कैश इधर उधर खर्च करते  है तो उससे कुछ लाभ होगा पर 6.2 की  स्थिति आपके साथ बानी रहेगी।  

मतलब  महंगाई दर इक्वल में आप खड़े हैं जो पैसा आपके पास है वह खर्च कर रहे हैं पैसे की कीमत हमेशा वही बरकरार रहेगी और अगर आप उस पैसे को फिक्स डिपोजिट में रख रहे  है तो 5.30% हो जाएगा फिर महगाई दर ज्यादा है  उससे जो इंटरेस्ट  आएगा उससे भी कोई लाभ  नहीं हो रहा है रुपय की कीमत  फिर  तीन साल बाद जो पैसा आपके पास पैसा आएगा ओर खत्म हो जाएगा और 3 साल के बाद सोना जो है आपको 15 पर्सेंट का लाभ देगा अगर जो आपने आज खरीदा हुआ है तो यह तो आठ परसेंट लोगों के लिए सोना है लेकिन 92% के लिए कौन-सी प्लानिंग है कौन सी स्थिति  है तो तीन सवाल आखिर में क्या 2022 तक इस देश के भीतर में बैंक डूब जाएंगे पहला सवाल  बहुत साफ़ है,  दूसरा सवाल क्या इस देश की इकनॉमी और लोगों का पैसा जिस रूप में जहा -जहा  जमा है उस पर खतरा मंडराने लगा है और तीसरा सवाल है अगर रोजगार नहीं दे पाए अर्थव्यवस्था की चक्की को नहीं चला पाए अगर इस देश में प्रोडक्शन रुका रहा और शेयर मार्केट इसी तरीके से आप बढ़ाते रहे और विदेशी पूंजी भारत के खजाने में खूब जमा है इसी की जानकारी देकर इस बात पे  हो-हल्ला मचाते रहे कि हमारे पास तो खूब पैसा है इतना पैसा तो किसी के पास नहीं है दुनिया में तो देश के भीतर का अनूठा सच यह होगा कि सरकार के पास पूंजी के लिए आरबीआई होगा और उसके सरकारी खजाने में जमा विदेशी पूंजी होगी इस देश की अपनी इकोनॉमी कुछ नहीं बचेंगी  उस इकोनॉमी  का सबसे बुरा सबसे पहला असर पहली बार इस देश की इंडस्ट्री पर पड़ेगा दूसरा असर एग्रीकल्चर पे पड़ेगा तीसरा असर उसके बाद नौकरी पेशा लोगों पर पड़ेगा जो अभी तक ही मानकर चल रहे हैं कि उनका रोजगार तो सुरक्षित है वो चाहे IAS हो, IPS हो IRS हो या किसी भी फिल्ड की सरकारी नौकरी में हो जिनकी तादाद इस  देश के भीतर में लगभग सवा करोड़ है और  कॉर्पोरेट फॉर इंडस्ट्रीज सेसा जुड़े हुए लगभग डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग जो जुड़े हुए हैं. उनके ऊपर भी आने वाले वक्त में खतरे के बादल मडरांएगे।

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ASE News: क्या सिर्फ नोट छापने से गिरती अर्थव्यवस्था संभल जाएगी ?
क्या सिर्फ नोट छापने से गिरती अर्थव्यवस्था संभल जाएगी ?
The inflation rate will go up. That is, inflation will reach the peak, but the situation will definitely reach the peak of inflation, because
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