Ganga Saptami- गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा का हुआ था पुनर्जन्म

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Ganga Saptami- गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा का हुआ था पुनर्जन्म

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हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है. धार्मिक रूप से यह दिन बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन ही मां गं

पूजा में न करें इस तरह के फूलों का इस्तेमाल, जानें भगवान को कैसे पुष्प अर्पित किए जाते हैं
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Ma Ganga
हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है. धार्मिक रूप से यह दिन बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन ही मां गंगा की उत्पत्ति हुई थी और वे स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं. इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी जैसे नामों से जाना जाता है. इस दिन गंगा स्नान और पूजन का खास महत्व है. इस बार यह पर्व 18 मई को मनाया जाएगा.

जहु ऋषि की कन्या होने के कारण गंगा को कहते हैं जाह्नवी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता गंगा तीव्र गति से बह रही थीं, उस समय ऋषि जहु, भगवान के ध्यान में लीन थे और उनका कमंडल व अन्य सामान भी वहीं पर रखा था. जिस समय गंगा जी जहु ऋषि के पास से गुजरी, तो वह उनका कमंडल और अन्य सामान भी अपने साथ बहाकर ले गई. जब जहु ऋषि की आंख खुली तो अपना सामान न देख, वह क्रोधित हो गए, उनका क्रोध इतना ज्यादा था कि अपने गुस्से में वह पूरी गंगा को ही पी गए, जिसके बाद भागीरथ ऋषि ने जहु ऋषि से आग्रह किया कि वह गंगा को मुक्त कर दें.
जहु ऋषि ने भागीरथ का आग्रह स्वीकार किया और गंगा को अपने कान से बाहर निकाला. जिस समय यह घटना घटी थी, उस समय वैशाख पक्ष की सप्तमी थी. इसलिए इस दिन से गंगा सप्तमी मनाई जाने लगी. इसे माता गंगा का दूसरा जन्म भी कहा जाता है. ऐसे में जहु ऋषि की कन्या होने के कारण ही गंगा जी को जाह्नवी भी कहा जाता है.

गंगा सप्तमी 2021 शुभ मुहूर्त 

सप्तमी तिथि प्रारंभ 18 मई दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से. सप्तमी तिथि समाप्त : 19 मई दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक.

घर पर इस तरह से करें मां गंगा का पूजन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. लेकिन अगर गंगा स्नान कर पाना संभव न हो तो घर पर रहकर ही अपने ऊपर गंगा जल की कुछ बूंदे छिड़क लें या एक बाल्टी में थोड़ा गंगा जल डालकर पानी मिलाकर उससे स्नान करें. इसके बाद मां गंगा की प्रतिमा को रखकर पूजन करें या महादेव की आराधना करें. क्योंकि इस दिन भगवान शिव की आराधना भी बहुत फलदायी मानी जाती है. उन्हें चंदन, पुष्प, प्रसाद, अक्षत, दक्षिणा आदि अर्पित करें. श्री गंगा सहस्र नामस्तोत्रम का पाठ करें और ‘ओम नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा मंत्र का जाप करें.

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