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जानिए मेघालय के बारे में

जानिए मेघालय के बारे में








About Meghalaya

मेघालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेघालय का शाब्दिक अर्थ- मेघों का आलय अर्थात बादलों का घर है। यह मूलतः पहाड़ी राज्य है। यहां खासी, जयंतिया व गारो आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। प्रदेश का ब्रिटिश शासनकाल से पूर्व का इतिहास उपलब्ध नहीं है। यहां सन् 1765 तक खासी जनजाति के 25 छोटे राज्य थे। 1956 में राज्य पुनर्गठन योजना के तहत लोगों ने पृथक राज्य की मांग की, किन्तु इसे अस्वीकार कर दिया गया। 1960 में ऑल पार्टी हिल लीडर्स कांग्रेस का गठन करके शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया गया। 1970 में केंद्र सरकार ने असम राज्य के पहाड़ी जिलों को स्वायत्त राज्य का दर्जा दिया। 21 जनवरी, 1972 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया गया। मेघालय को पूर्व का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है।

मेघालय की ‌भौगोलिक स्थिति

मेघालय एक पहाड़ी प्रदेश है। इसके मध्य एवं पूर्वी भागों में खासी और जयंतिया पहाड़ियां हैं। मेघालय की राजधानी शिलांग एक ऊंचे पठार के केंद्र में स्थित है। मेघालय की सबसे ऊंची पर्वत चोटी (शिलांग चोटी) 1,965 फीट ऊंची है। नोकरेक दूसरे नम्बर की चोटी है, जो गारो हिल्स जिले में है। विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान मासिनराम यहीं पर है।

मेघालय की नदियां

कृष्णाई [उमरिंग], काला जीरा], रिमोई [बुगी], निटाई [ रंग] और सोमेश्वरी ([सिम सोंग] गारो हिल्स,जिले में होकर बहती है। किशी, ग्वार, उमरेठ, उमंगोट, उमियाम, माफलंग और अभियान ख्वान खासी हिल्स एवं कृषि, पिंटू और मिनतांग जयंतिया हिल्स जिले में होकर नदियां बहती हैं। राज्य में वार्षिक वर्षा लगभग 1200 मिलीमीटर है। राज्य की सीमा उत्तर एवं पूर्व में असम तथा दक्षिण और पश्चिम क्षेत्र में बांग्लादेश से मिलती हैं।

मेघालय की आर्थिक स्थिति

मेघालय बुनियादी तौर पर कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अस्सी प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। यहां पर चावल, मक्का, आलू, पटसन, मेस्ता, कपास, तेज पत्ता, अदरक प्रमुख फसलें हैं। राज्य में लकड़ी एवं खनिज आधारित उद्योग प्रमुख हैं। फर्नीचर निर्माण, लौह इस्पात के उद्योग भी यहां लगे हुए हैं। इसके साथ ही कोयला, डोलोमाइट, चूना-पत्थर, फेल्सपार, अग्निमृतिका [फायर क्ले], बालुका, क्वार्ट्ज और थोरियम भी प्राप्त किया जाता है। देश में उपस्थित सिल्मेनाइट का 95 प्रतिशत भाग इसी प्रदेश से निकाला जाता है। 

राज्य का परिवहन

राज्य से तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिनकी कुल लम्बाई 810 किमी. है। प्रदेश में सड़कों की कुल लम्बाई 9,565 किमी. है। राज्य में रेल लाइन नहीं है। यहां एकमात्र हवाई अड्डा उमरोई में है, जो शिलांग से 35 किमी. है।

यहां के त्योहार

पांच दिन तक मनाया जाने वाला का पाठलाग-नोंगक्रेम
खासियों का एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है। यह नोंगक्रेम नृत्य के नाम से भी प्रसिद्ध है। शाद सुक मिनसीम खासियों का एक अन्य महत्वपूर्ण पर्व है, जो शिलांग में मनाया जाता है। बेहदीनखलम जयंतिया आदिवासियों का सबसे महत्वपूर्ण तथा हर्षोल्लास भरा त्योहार है। यह आमतौर पर जुलाई में जयंतिया पहाडियों के जोवई कस्बे में मनाया जाता है। गारो आदिवासी अपने देवता सलजोंग (सूर्य देवता) के सम्मानमें वांगला त्योहार मनाते हैं, जो एक सप्ताह तक चलता है।

मेघालय के पर्यटन स्थल

मेघालय का मनोरम वातावरण, खूबसूरत दृश्यावली, पर्वत श्रृंखला, शीतल झरने, हरे-भरे मैदान तथा यहां की परम्परागत संस्कृति पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। यहां का गोल्फ कोर्स दश के बेहतरीन गोल्फ कोसों में से एक है। 
शिलांग– यहां की प्राकृतिक सुषमा अद्भुत है। शिलांग का आधुनिक स्वरूप अंग्रेजों की देन है। यह घुमावदार पहाड़ों, खूबसूरत गिरिजाघरों, मकानों की शिल्पकला तथा चीड़ के संघन पेड़ें से अनोखा शहर लगता है। इस शहर में आधुनिकता एवं पारम्परिक संस्कृति की मिली-जुली खुशबू घुली हुई है। 
वार्डस लेक– शहर के बीचों-बीच स्थित यह सुंदर मनोरंजन पार्क है। यहां नौका विहार का आनंद लिया जा सकता है। पेड़-पौधों में रुचि रखने वालों के लिए यहाँ बाटनिकल गार्डन है। 
लेडी हैदरी पार्क– यहां सुंदर चिड़ियाघर के अलावा अनेक प्रकार के फूलों के बाग हैं। बच्चों के खेलकूद के लिए कई प्रकार के झूले लगे हुए हैं। पार्क के पास क्रिनोलिन झरना तथा तैराकी का तालाब भी है। शिलांग पीक-शिलांग से दस किलोमीटर दूर स्थित इस चोटी से शहर की भव्यता का अवलोकन किया जा सकता है। शिलांग की तुलना स्कॉटलैण्ड में एडिनबर्ग दुर्ग से दिखाई देने वाले दृश्य से की जाती है। 
मासिनराम-विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान भी इसी प्रदेश में है। इस स्थान का भी आनंद उठाया जा सकता है।
मेघालय में प्रकृति अपने मनोरम रूप में दिखाई देती है। राजधानी शिलांग में कई रमणीक एवं दर्शनीय स्थल हैं। वार्ड लेक, लेडी हैदरी पार्क, पोलो ग्राउण्ड, मिनी चिड़ियाघर, एलीफेंट जलप्रपात और शिलांग पहाड़ी प्रमुख हैं। नांगरी बलम एवं सीजी प्रमुख प्राणी विहार हैं।