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जानिए भारत के भूगोल के बारे में

जानिए भारत के भूगोल के बारे में

India geography

भारत दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के मुख्य परिमण्डलों से आबद्ध ग्लोब के बड़े भाग पर स्थित है विस्तार की दृष्टि से विश्व में सातवें स्थान पर है। इसका क्षेत्रफल 3287263 वर्ग किमी. है जो संसार के कुल क्षेत्रफल का 2.42 प्रतिशत है। यह पूर्णतः उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है, जिसकी मुख्य भूमि 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांशों के मध्य तथा 687 पूर्व देशान्तर से 97° 25′ पूर्वी देशान्तर के मध्य विस्तृत है। इसकी मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिन्दु उष्णार्ट कन्याकुमारी (केप केमोरिन) है जबकि इसका दक्षिणावर्ती भाग 6° 45′ उत्तरी अक्षांश पर अवस्थित इन्दिरा पाइंट है। इसका विस्तार उत्तर से दक्षिण में 3214 किमी. और पूर्व से पश्चिम तक 2,933 किमी. है। जबकि मुख्य भूमि के तट की लम्बाई 6,100 किमी. है।

भारत का नामकरण

प्राचीनकाल में भारत को आर्यावर्त कहा जाता था जबकि ‘ऋग्वेद’ में आर्यों के प्रभुत्व वाले भाग को सप्त संधव कहा गया है। पारसियों के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘जेन्द अवेस्ता’ में सप्त सिन्धु के स्थान पर ‘हफ्त हिन्दू’ का उल्लेख किया गया है, क्योंकि पारसियों ने ‘स’ को ‘ह’ सम्बोधित किया है।
यहां सप्त सिन्धु का अर्थ सात नदियों के देश से लिया गया है। बाद में आर्यों का निवास क्षेत्र विस्तृत है तथा भारत को आर्यावर्त के स्थान पर भारतवर्ष कहा जाने लगा। पुराणों में इसे जम्बू द्वीप कहा गया है। जम्बू द्वीप का विस्तार उत्तर में साइबेरिया तक माना गया है तथा भारत के दक्षिण में स्थित था। मत्स्य पुराण में हिमालय से हिन्द महासागर के मध्य की संस्कृति को भारत तथा भू-भाग को भारत वर्ष कहा गया है। यूनानियों एवं रोमवासियों ने भारत को इण्डिया नाम दिया है। यूनानी सिन्धु नदी को इण्डोस तथा रोमवासी इण्ड्स कहते थे। इस प्रकार इण्डिया शब्द सिन्धु नदी या इण्डस नाम से उद्भुत हुआ है। बाद में इण्डिया को भारत व हिन्दुस्तान कहा जाने लगा। संविधान में हमारे देश का नाम भारत या इण्डिया तथा इण्डिया जो भारत है, स्वीकृत है। हिन्द महासागर का नामकरण भी हमारे देश (हिन्दुस्तान) के नाम पर किया गया है

भारत के पड़ोसी देश

भारत अरब सागर, बंगाल की खाड़ी तथा हिन्द महासागर से घिरा है। उत्तर तथा पूर्व में इसकी सीमाओं को हिमालय तथा उसकी श्रृंखलाएं निर्धारित करती हैं । बगाल की खाड़ी में अण्डमान तथा निकोबार द्वीप-समूह और अरब सागर में लक्षद्वीप समूह स्थित है जो मुख्य भूमि से समुद्र द्वारा विलग किए गए हैं। समुद्री सीमा के आधार पर भारत का सबसे निकट का पड़ोसी देश श्रीलंका है। पाक जलडमरूमध्य भारत को श्रीलंका से अलग करता है। दूसरा निकटतम पड़ोसी देश इण्डोनेशिया है जो निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण में स्थित है। लक्षद्वीप के दक्षिण में मालदीव स्थित है।
 ‌भारत के पूर्व में बांग्लादेश, म्यांमार तथा पश्चिम में पाकिस्तान, अफगानिस्तान है। उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत श्रृंखला में मुजताय, अगील, कुनलुन तथा कराकोरम श्रेणियां जम्मू-कश्मीर की सीमा पर है। इसके उत्तर एवं पूर्व में तिब्बत का पठार है, जो अब चीन के अधीन है। इसके बाद भारतीय सीमा दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व की ओर मुड़ती है। सिंधु नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक यह सीमा लगभग 2400 किमी. लम्बी है। इन्हीं नदियों के बीच वाले भाग में नेपाल तथा भूटान है। भूटान के पूर्व की ओर उच्च हिमालय भाग है जो भारत तथा चीन के बीच अन्तरराष्ट्रीय सीमा का कार्य करता है। इसे मैकमोहन रेखा के नाम से जाना जाता है। तिब्बत की राजनैतिक तथा आध्यात्मिक राजधानी ल्हासा भारत की सीमा से 300 किमी. से भी कम दूरी पर है। पूर्व में पहाड़ियों एवं पर्वतमालाओं की लम्बी कतार में म्यांमार से अलग करती है। इन पर्वतों और पहाड़ियों में मिशमी, पटकाई, नगा, बैरील पर्वतमाला, लुशाई तथा अराकान योमा पर्वत मालाएं हैं। ये दक्षिण की ओर बंगाल की खाड़ी में डूब जाने के बाद पुनः अण्डमान निकोबार द्वीपों के रूप में समुद्र तल के ऊपर उभर आती हैं।

भारत का भौतिक विभाजन

भारत का भौतिक विभाजन पांच भागों में किया जाता है, ये हैं- 1. हिमालय, 2. सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मै मैदान,‌‌ 3. प्रायद्वीपीय पठार, 4. तटीय मैदान, 5. द्वीप हिमालय भारत के उत्तर में पश्चिम से पूर्व दिशा में सिन्धु तथा ब्रह्मपुत्र नदियों के बीच लगभग 2400 किलोमीटर लम्बा हिमालय पर्वत है। इसकी चौड़ाई 160 से 400 किलोमीटर है। हिमालय पर्वत समूह को हम तीन भागों में बांटते हैं। वृहत् हिमालय- की औसत ऊंचाई 6,000 मीटर तथा औसत चौड़ाई लगभग 25 किलोमीटर है।
मध्य हिमालय यह वृहद हिमालय के दक्षिण में लगभग उसके समानान्तर पूर्व-पश्चिम दिशा में विस्तृत है। इसकी औसत चौड़ाई 80 किलोमीटर तथा ऊंचाई 3,700 से 4,500 मीटर है। इसकी कई शाखाएं हैं जिनमें पीर पंजाल तथा धौलाधर प्रसिद्ध है। वृहत् तथा लघु हिमालय के बीच विस्तृत घाटियां हैं, जिनमें कश्मीर घाटी तथा नेपाल में काठमाण्डु घाटी प्रसिद्ध है। भारत के अधिकांश स्वास्थ्यवर्द्धक स्थान, जैसे शिमला, मसूरी, डलहौजी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदि लघु हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर स्थित हैं।

बाह्य हिमालय या शिवालिक श्रेणी:-‌‌

लघु हिमालय के दक्षिण में इसके समान्तर पूर्व-पश्चिम दिशा में यह फैली हुई है। इसकी चौड़ाई 10 से 50 किलोमीटर तथा ऊंचाई 900 से 1200 मीटर तक है। यह हिमालय पर्वत-श्रृंखला की अन्तिम श्रेणी है। लघु हिमालय तथा बाह्य हिमालय के बीच कहीं-कहीं कुछ विस्तृत घाटियां पाई जाती हैं जिन्हें पश्चिम में दून तथा पूर्व में दुआर कहते हैं। देहरादून, कोटरीदून तथा पाटलीदून इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

हिमालय की शाखाएं:-

हिमालय की शाखाओं को दो भागों में बांटा जा सकता है। उत्तर-पश्चिमी शाखाएं:- ये शाखाएं सिन्धु नदी से परे उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में विस्तृत है। इनमें सुलेमान, किरथर, बुगती एवं हजारा सम्मिलित है। लद्दाख के उत्तर-पूर्व में काराकोरम पर्वत श्रेणी है। इसकी औसत ऊंचाई 6000 मीटर है। इसकी सबसे ऊंची चोटी का नाम K, (गाडविन आस्टिन) है जिसकी ऊंचाई 8,611 मीटर है। यह भारत की सबसे ऊंची चोटी है।

उत्तर-पूर्वी शाखाएं:-

ये भारत तथा म्यांमार के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है। उत्तर से दक्षिण की ओर फैली इस श्रेणी की मुख्य पहाड़ियों के नाम पटकाई, मणिपुर, मीजो आदि हैं। 
हिमालय का प्रादेशिक विभाजन:‌ पंजाब हिमालय- सिन्धु नदी एवं सतलज नदी के बीच वाले पर्वतीय भाग पंजाब हिमालय कहलाता हैं। इसका अधिकांश भू-भाग जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में पाया जाता है।

कुमायूं हिमालय:- ‌‌

यह सतलुज नदी तथा काली नदी के बीच 320 किलोमीटर लम्बा क्षेत्र है। गंगा तथा यमुना नदियों का उद्गम इसी भाग में है। नेपाल हिमालय:- यह काली नदी से तीस्ता नदी तक लगभग 800 किलोमीटर लम्बा भाग है। हिमालय का यह inभाग सबसे ऊंचा है, जिसमें एवरेस्ट, कंचनजंघा, धौलागिरी, मकालू तथा अन्नपूर्णा आदि प्रसिद्ध चोटियां हैं। असम हिमालय:- तीस्ता नदी से लेकर दिहांग(सांगपो- बुरहानपुर) तक 720 किलोमीटर लम्बा भाग असम हिमालय कहलाता है।

सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान:-‌‌

हिमालय पर्वत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के बीच सिन्धु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र आदि नदियों का विशाल मैदान है। इसे उत्तरी भारत का मैदान भी कहते हैं। पश्चिम दिशा में इसकी लम्बाई लगभग 2400 किलोमीटर है। यह 150 से 500 किलोमीटर तक चौड़ा है। असम में यह मैदान संकरा है और इसकी चौड़ाई केवल 90 से 100 किलोमीटर तक है। राजमहल की पहाड़ियों के पास इसकी चौड़ाई 160 किलोमीटर तथा इलाहाबाद के निकट 280 किलोमीटर है। गंगा तथा सिन्धु नदियों के डेल्टा इसके महत्वपूर्ण अंग हैं। सिन्धु की सहायक नदियों सतलज, व्यास, रावी, चेनाब तथा झेलम नामक पांच नदियों द्वारा बने हुए मकान को पंजाब का मैदान कहते है यह मुख्यतः दोआबों से निर्मित है।